Essay On Save Energy In Hindi

Best Essay on Energy Conservation in Hindi/ उर्जा संरक्षण पर निबंध

प्रकति ने मानव जाति के लिए उर्जा संसाधनों के रूप में उन्हें बहुत ही अनमोल तोहफे प्रदान किये हैं, जो लोगों के रहन-सहन और इस धरती पर जीवन जीने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सभी प्राणी और जीव-जन्तु अपने बच्चों के लिए बहुत कुछ सोचते हैं और हम इंसान भी अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं. अगर हम सभी ये चाहते हैं कि हमारी पीढ़ी आने वाले समय में अच्छे से रहे तो क्या हमें उर्जा के संरक्षण पर ध्यान नही देना चाहिए….??

कैसा होगा कि आने वाले 100 सालों में धीरे धीरे करके सभी उर्जा के संसाधन ख़त्म होने लगें और हमारे बच्चे ही अपने पूर्वजों को गालियाँ दें कि काश हमारे पूर्वजों ने पहले से ही उर्जा के संसाधनों को बचाया होता तो आज हमें ये दिन देखना नही पड़ता, क्युकि उन लोगों के पास ना तो पेट्रोल बचेगा और ना ही बिजली.

 

उर्जा संरक्षण क्या है…??

 

 

उर्जा संरक्षण का सीधा सीधा मतलब है ऊर्जा का बचाव.
उर्जा के सभी स्रोत जैसे पेट्रोल, लकड़ी, बिजली आदि सभी सीमित हैं और अगर हम लोग ऐसे ही बहुत तेज़ी से इनको use करते रहें तो जल्दी ही एक वक़्त ऐसा आएगा जब ये सभी संसाधन ख़त्म हो जायेगें. इसलिए ऊर्जा के इन सभी संसाधनों का बचाव करना ही होगा. ऊर्जा संरक्षण से पैसा, वक़्त और ये पर्यावरण सभी को बचाया जा सकता है. ये काम सिर्फ किसी एक आदमी के बस का नही है, बल्कि सभी को इसमें अपना अपना योगदान देना होगा तभी जाकर हम कुछ उर्जा संरक्षण को बढ़ावा दे पाएंगे.

 

Source of Energy Conservation:

जब इंसान को इस बात का एहसास हुआ कि जैसे हम ऊर्जा का उपयोग इतनी तेज़ी से करते जा रहे हैं तो उन्होंने उर्जा के दुसरे स्रोत ढूढने शुरू कर दिए और वो एक बार फिर से प्रकति की तरफ बढ़ गया इन संसाधनों की खोज में.

वैकल्पिक ऊर्जा के रूप में उसने सौर उर्जा, पवन उर्जा, बायोमास आदि का उपयोग करना शुरू किया जो अथाह ऊर्जा के भण्डार हैं.

Solar Energy: ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों में सौर ऊर्जा को काफी हद तक विकसित किया जा चुका है क्युकी ये कभी न ख़त्म होने वाली ऊर्जा है. इसमें सूरज की ऊर्जा और रौशनी से heat, light और बिजली बनाई जाने लगी है जिससे काफी मात्रा में ऊर्जा संकट से निवारण मिला है. बहुत से solar products अब तो मार्किट में भी आसानी से मिल रहे हैं जैसे solar panel, solar lights, solar charger और तो और अब तो वाहन भी सोलर से चलना शुरू हो गये हैं जैसे solar car, solar bike आदि.
बिजली बनाने के लिए अब काफी बड़े बड़े solar plant लगाये जा रहे हैं और सरकार भी इस संरक्षण में अपना अहम् योगदान दे रही है. Rural areas में जहाँ पहले बिजली का नमो=निशान तक नही था वहां भी अब solar panel लगाये जा रहे हैं और बिजली प्रदान की जा रही है.

Wind Energy: पवन उर्जा भी बिजली बनाने और mechanical power generate करने में अहम् योगदान देती है. भारत में काफी ऐसे इलाके हैं जहाँ पहाड़ और रेगिस्तान हैं और वहां हवा का बहाव भी काफी तेज़ रहता है ऐसे इलाकों में सरकार ने पवन चक्कियों का निर्माण कराया है जिससे यांत्रिक और बिजली दोनों तरीके की ऊर्जा का उत्पादन किया सके.

Biomass Energy: हम अपने घरों में खाना पकाने के लिए LPG गैस का उपयोग करते हैं, लेकिन उर्जा संरक्षण के लिए बायोगैस से बेहतर कोई विकल्प नज़र नही आता. Plant और animal waste से बायोगैस आसानी से बनायीं जा सकती है और उस गैस को बहुत से उपयोगी कामों में लाया जाता है. इससे हमारे धन की बचत के साथ साथ पर्यावरण सुरक्षा में भी योगदान होता है.

 

उर्जा संरक्षण के अन्य उपाय:

 

 

अभी हमने बात कि ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के बारे में जहाँ प्रकति के पास अपार ऊर्जा भण्डार का उपयोग किया जा रहा है और अब हम बात कर रहे हैं कुछ छोटी छोटी बातों की जिनसे हम उर्जा को बचने में और भी कामयाब हो सकते हैं.

1). हम सभी के घरों में रौशनी के लिए light bulb लगे होते हैं, अगर हम incandescent bulb की बजाय LED light का उप्यद करते हैं तो हम 80% बिजली बचा सकते हैं और साथ ही इन bulb की रौशनी काफी अच्छी और इनकी life भी बहुत होती है.

2). अगर हमारे घर में A/C है तो आपको smart और programmable thermostat use करना चाहिए जिससे आप जिस temperature पर उसको set करना चाहते हैं तो उस तापमान के बाद A/C अपने आप ही बंद हो जाएगा और तो और आप A/C के ON-Off होने का timing भी set कर सकते हैं, इससे आप ऊर्जा की काफी मात्रा को बचने में सफल हो सकते हैं.

3). Industries में कागज का बहुत ज्यादा use किया जाता है इसलिए अगर हो सके तो कागज को फिर से recycle करने के लिए भेज दें जिससे व्ही बेकार कागज फिर से उपयोगी बन जाएगा और हमें बार बार नए कागज बनाने के लिए पेड़ों को काटना नही पड़ेगा, ये पर्यावरण सुरक्षा में अहम् कदम साबित हो सकता है.

4). अपने घरों के electric appliance को completely switch off करने के लिए आपको smart power strips use करनी चाहिए. ये strips automatically electrical devices को बंद कर देती हैं जब इनका use नही किया जा रहा होता. इससे आपके घर की बिजली के बिल की बचत के साथ ऊर्जा के बचाव में भी सहायता मिलेगी.

 

उर्जा संरक्षण किसी एक आदमी या फिर सिर्फ सरकार के बस का नही है, बल्कि इसमें हर आदमी को भागिदार होना है. ऊर्जा संरक्षण एक बहुत महत्वपूर्ण चर्चा का विषय है जिसे अभी गंभीरता से नही लिया गया तो शायद काफी देर हो जायेगी और फिर शायद हमारे पास खोने के लिए कुछ भी ना बचे.

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उम्मीद करता हूँ कि “Best Essay on Energy Conservation in Hindiआर्टिकल आपको पसंद आया होगा.

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भारत में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस

पूरे भारत में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस लोगों द्वारा हर साल 14 दिसम्बर को मनाया जाता है। भारत में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम वर्ष 2001 में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) द्वारा निष्पादित (स्थापित) किया गया। ऊर्जा दक्षता ब्यूरों एक संवैधानिक निकाय है जो भारत सरकार के अंतर्गत आता है और ऊर्जा का उपयोग कम करने के लिए नीतियों और रणनीतियों के विकास में मदद करता है।

भारत में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम का उद्देश्य पेशेवर, योग्य और ऊर्जावान प्रबंधकों के साथ ही लेखा परीक्षकों को नियुक्त करना है जो ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं को लागू करने और ऊर्जा, परियोजनाओं, नीति विश्लेषण, वित्त प्रबंधन में विशेषज्ञ हों।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस 2018

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस 2018 में शुक्रवार, 14 दिसम्बर को मनाया जायेगा।

ऊर्जा संरक्षण क्या है?

भारत में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस लोगों को ऊर्जा के महत्व के साथ ही साथ बचत, और ऊर्जा की बचत के माध्यम से संरक्षण बारे में जागरुक करना है। ऊर्जा संरक्षण का सही अर्थ है ऊर्जा के अनावश्यक उपयोग को कम करके कम ऊर्जा का उपयोग कर ऊर्जा की बचत करना है। कुशलता से ऊर्जा का उपयोग भविष्य में उपयोग के लिए इसे बचाने के लिए बहुत आवश्यक है। ऊर्जा संरक्षण की योजना की दिशा में अधिक प्रभावशाली परिणाम प्राप्त करने के लिए हर इंसान के व्यवहार में ऊर्जा संरक्षण निहित होना चाहिए।

कोई भी ऊर्जा की बचत इसकी गंभीरता से देखभाल करके कर सकता है, दैनिक उपयोग के बहुत से विद्युत उपकरणों को जैसे: बिना उपयोग के चलते हुये पंखों, बल्बों, समरसेविलों, हीटर को बंद करके आदि। यह अतिरिक्त उपयोग की ऊर्जा की बचत करने का सबसे कुशल तरीका है जो ऊर्जा संरक्षण अभियान में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

जीवाश्म ईंधन, कच्चे तेल, कोयला, प्राकृतिक गैस आदि दैनिक जीवन में उपयोग के लिए पर्याप्त ऊर्जा उत्पन्न करते हैं लेकिन दिनों-दिन इनकी बढ़ती मांग प्राकृतिक संसाधनों के कम होने का भय पैदा करता है। ऊर्जा संरक्षण ही केवल एक ऐसा रास्ता है जो ऊर्जा के गैर- नवीनीकृत साधनों के स्थान पर नवीनीकृत साधनों को प्रतिस्थापित करता है।

ऊर्जा उपयोगकर्ताओं को ऊर्जा की कम खपत करने के साथ ही कुशल ऊर्जा संरक्षण के लिये जागरुक करने के उद्देश्य से विभिन्न देशों की सरकारों ने ऊर्जा और कार्बन के उपयोग पर कर लगा रखा है। उच्च ऊर्जा उपभोग पर कर ऊर्जा के प्रयोग को कम करने के साथ ही उपभोक्ताओं को एक सीमा के अन्दर ही ऊर्जा का प्रयोग करने के लिये प्रोत्साहित करता है।

लोगों को इस विषय पर अधिक जागरुक होना चाहिये कि, कार्यस्थलों पर तेज रोशनी विभिन्न परेशानियों (बीमारियों) को लाती है जैसे: तनाव, सिर दर्द, रक्तचाप, थकान और कार्यक्षमता को कम करता है। जबकि, प्राकृतिक प्रकाश कार्यकर्ताओं के उत्पादकता के स्तर को बढ़ाता है और ऊर्जा की खपत को कम करता है।

भारत में पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान एसोसिएशन वर्ष 1977 में भारत सरकार द्वारा भारतीय लोगों के बीच ऊर्जा संरक्षण और कुशलता को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया था। ये ऊर्जा का संरक्षण महान स्तर पर करने के लिये भारत सरकार द्वारा उठाया गया बहुत बड़ा कदम है। बेहतर ऊर्जा कुशलता और संरक्षण के लिए भारत सरकार ने एक अन्य संगठन ऊर्जा दक्षता ब्यूरों को भी 2001 में स्थापित किया गया।

ऊर्जा संरक्षण के क्या उपाय हैं?

  • थर्मल पर्दें, स्मार्ट खिड़कियों के अलावा खिड़कियाँ ऊर्जा का संरक्षण करने में सबसे बड़ा कारक है।
  • ऊर्जा की एक बड़ी मात्रा को प्राकृतिक रोशनी और कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लैंप या सीएफएल से (15W और अन्य साधनों के द्वारा ऊर्जा खपत का केवल 1/4वां भाग की खपत), फ्लोरोसेंट बल्ब, रैखिक फ्लोरोसेंट, सौर स्मार्ट टॉर्च, स्काई लाइट, खिड़कियों से प्रकाश व्यवस्था और सौर लाइट का प्रयोग करके बचाया जा सकता है।
  • जल संरक्षण भी बेहतर ऊर्जा संरक्षण का नेतृत्व करता है। लोगों के द्वारा हर साल लगभग हजारों गैलन पानी बर्बाद किया जाता है जिसकी विभिन्न संरक्षण के साधनों जैसे: 6 जीपीएम या कम से कम प्रवाह वाले फव्वारों, बहुत कम फ्लश वाले शौचालय, नल जलवाहक, खाद शौचालयों का प्रयोग करके बचत की जा सकती है।
  • पृथक्करण सर्दी के मौसम में थर्मल को कम करने के साथ ही गर्मियों में थर्मल प्राप्त करके भी ऊर्जा के संरक्षण में बहुत अहम भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिये, प्राकृतिक ऊन पृथक्करण, घर पृथक्करण, कपास पृथक्करण, रेशा पृथक्करण, थर्मल पृथक्करण आदि।

 

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस कैसे मनाया जाता है

पूरे भारत में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण के अभियान को और प्रभावशाली और विशेष बनाने के लिये सरकार द्वारा और अन्य संगठनों द्वारा लोगों के बीच में बहुत सी ऊर्जा संरक्षण प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जाता है क्योंकि वो ही इस अभियान का मुख्य लक्ष्य है। कई जगहों पर संगठनों के छात्रों या सदस्यों द्वारा ऊर्जा संरक्षण दिवस पर स्कूल, राज्य, क्षेत्रीय या राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न चित्रकला प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती है।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण अभियान भारत में ऊर्जा संरक्षण की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए विद्युत मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया राष्ट्रीय जागरूकता अभियान है। छात्रों के लिये कई स्तरों पर चित्रकारी प्रतियोगिताओं का आयोजन इस अभियान की मुख्य गतिविधियों में से एक है जो इस अभियान में भाग लेने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के लिये ऊर्जा संरक्षण के महत्व के साथ साथ शिक्षित करने में मदद करता है। ये प्रतियोगिता घरेलू क्षेत्रों के लोगों को भी जागरूक करने में मदद करती है। हर एक प्रतिभागी को एक विषय दिया जाता है जैसे: “अधिक सितारें, अधिक बचत”, “वर्तमान में ऊर्जा का अपव्यय, भविष्य में ऊर्जा की कमी” और “ऊर्जा का बचाव भविष्य का बचाव” आदि। प्रतियोगी अपने चित्रों को पेंसिल के रंगों, मोम के रंगों और पानी के रंगों आदि का प्रयोग करके अधिक प्रभावशाली बनाते हैं।

प्रतियोगिता में भाग लेने और जीतने वाले छात्रों को भागीदारी प्रमाण पत्र, योग्यता प्रमाण-पत्र और या नकद पुरस्कार 33,000 रुपये प्रति राज्य दिया जाता है। 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के समारोह कार्यक्रम में विद्युत मंत्रालय द्वारा सम्मानित राज्य के विजेताओं के बीच यह राशि बाँट दी जाती है।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस का उद्देश्य

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस हर साल एक विशेष विषय के साथ कुछ लक्ष्यों और उद्देश्यों को ध्यान में रखकर लोगों के बीच अधिक प्रभावशाली बनाने के लिये मनाया जाता है।

  • यह लोगों के बीच जीवन के हर क्षेत्र में ऊर्जा संरक्षण के महत्व का संदेश भेजने के लिए मनाया जाता है।
  • ऊर्जा संरक्षण की प्रक्रिया को बढावा देने के लिये पूरे देश में बहुत से कार्यक्रमों जैसे: विचार विमर्श, सम्मेलनों, वाद-विवाद, कार्यशालाओं, प्रतियोगिताओं का आयोजन करना।
  • अत्यधिक और फालतू ऊर्जा के उपयोग के स्थान पर कम ऊर्जा के प्रयोग के लिये लोगों को प्रोत्साहित करना।
  • ऊर्जा की खपत में कमी और कुशलता पूर्वक उपयोग करने के लिये लोगों को प्रोत्साहित करना।

ऊर्जा सुरक्षा में भारतीय नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका

भारत के सभी और प्रत्येक नागरिक कुशलतापूर्वक ऊर्जा के उपयोग और भविष्य के लिये ऊर्जा की बचत के बहुत से तरीकों के बारे में जानते हैं। वो सभी नियमों, विनियमों और ऊर्जा दक्षता का समर्थन करने के लिये भारत सरकार द्वारा लागू की गई नीतियों का पालन करते हैं। भारत के नागरिक 11वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान ऊर्जा के उपयोग को कम करने के अभियान में प्रत्यक्ष अंशदान का भुगतान कर रहे हैं। देश में सकारात्मक बदलाव लाने और आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिये बच्चे बहुत बड़ी उम्मीद हैं।


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